हूँ ,जोऊ
थारा चाँदी वर्ण बाळ हर सोने रो बोरलो
के मेल है .... सोने अर चाँदी रो ..........
Saturday, January 28, 2012
सच लिख ,सच की बात कर
झूठ तोहीन है ,सच का साथ कर /
राह ईमान की चल ,ना मात कर ,
सफ़र कटेगा ,प्रेम की बात कर/
पांव जमीन पर रख ,नजर आसमान कर ,
शिखर छू जाएगा ,छूने का अरमान कर /
राह नेकी पर चल ,बदी त्याग कर ,
मंजिल मिलेगी यकीनन,'बाहिया' होंसला साथ कर /
Monday, January 16, 2012
धुंधली सुबह .....पुरानी राह से एक आहट सुनाई दी . मैंने पुच्छा....कोन ?.....
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फिर पुच्छा ...कोन हो भाई ?
तुम्हारा बच्चपन...;. . इतना कहने आया था --मेरी उंगली थामे चलो गे तो सफ़र अच्छा कट जाएगा .वर्ना तो आज की दुनिया में ..बड़ा बनने के चकर में चक्रघिन्नी हो जाओगे ......................